BE PROUD TO BE AN INDIAN

बुधवार, जुलाई 26, 2017

लघुकथा विधा पर विचार करती महत्त्वपूर्ण कृति

पुस्तक - आधुनिक हिंदी लघुकथा : आधार एवं विश्लेषण 
लेखक - रूप देवगुण 
प्रकाशन - सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल 
पृष्ठ - 216
कीमत - 450 / - ( सजिल्द )
लघुकथा विधा के रूप में कब शुरू हुई, प्रथम लघुकथा कौन-सी है, लघुकथा का विकास क्रम क्या है और इसके प्रमुख तत्व कौन से हैं, यह प्रश्न अभी तक अनुत्तरित हैं | अलग-अलग विद्वानों के मत अलग-अलग हैं, लेकिन इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढने के प्रयास जारी हैं | रूप देवगुण जी की कृति " आधुनिक हिंदी लघुकथा : आधार एवं विश्लेषण " इसी दिशा में किया गया महत्त्वपूर्ण प्रयास है, जिसे पढ़कर इन प्रश्नों के उत्तर ढूँढने में शोधार्थियों को काफ़ी मदद मिलेगी |

बुधवार, मई 10, 2017

ज़िंदगी की कुरूपता में आशा की धूप देखता कविता-संग्रह

कविता-संग्रह – मुट्ठी भर धूप
कवयित्री – अल्पना नागर 
प्रकाशक – हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी 
पृष्ठ – 126
कीमत – 200 /- ( सजिल्द )
77 कविताओं और 25 क्षणिकाओं से सज़ा कविता-संग्रह “ मुट्ठी भर धूप ” अल्पना नागर का पहला कविता-संग्रह है | “ मुट्ठी भर धूप ” किसी कविता का शीर्षक न होकर कवयित्री की उस आशावादी सोच का परिचायक है, जो इन कविताओं में यत्र-तत्र व्याप्त है | 

बुधवार, मई 03, 2017

रूप देवगुण की काव्य साधना को दिखाती पुस्तक

पुस्तक – काव्य का अनवरत यात्री : रूप देवगुण
लेखिका – डॉ. आरती बंसल
प्रकाशक – सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल
पृष्ठ – 144
कीमत – 300 /-
कविता की आलोचना के लिए भावुक मन और तार्किक बुद्धि दोनों की आवश्यकता होती है, क्योंकि भावुक मन कविता से तादात्म्य बैठाने में मदद करता है और तार्किक बुद्धि कविता के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने में मदद करती है | " काव्य का अनवरत यात्री : रूप देवगुण " नामक पुस्तक पढ़ते हुए यह बात यकीनी रूप से कही जा सकती है कि इस पुस्तक की लेखिका " डॉ. आरती बंसल " में ये दोनों गुण विद्यमान हैं |

बुधवार, मार्च 15, 2017

रूप देवगुण की कहानियों में प्रेम ( अंतिम भाग )

मानवेतर प्राणियों से प्रेम 

प्रेम का संबंध सिर्फ व्यक्तियों से नहीं | मानवेतर प्राणियों से भी प्रेम हो जाता है | मानवेतर प्राणी भी प्रेम को समझते हैं और प्रत्युत्तर में प्रेम करते हैं | सामान्यत: उनकी वफादारी आदमी से भी अधिक होती है | कुत्ता इनमें से सबके आगे है | कुत्तों को अक्सर घरों में पाला जाता है और कुत्ते और उसके मालिक के बीच आदमी-पशु जैसे संबंध न रहकर अपनत्व के संबंध पैदा हो जाते हैं | कुता मालिक और उसके परिवार को अपना मानता है | ‘ समभाव ’ इसी प्रेम को दर्शाती कहानी है |

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...