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बुधवार, अक्तूबर 11, 2017

प्रेम, समाज और जीवन-दर्शन की बात करता ग़ज़ल-संग्रह

ग़ज़ल-संग्रह – कहो बात दिल की
शायर – रूप देवगुण
प्रकाशक – सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल
पृष्ठ – 80
कीमत – 200 /- ( सजिल्द )
ग़ज़ल का हर शे’र आजाद होने के कारण शायर के पास अपनी बात कहने के मौके ज्यादा होते हैं | वह एक ही ग़ज़ल में विभिन्न पहलुओं को उठा पाने में सफल रहता है | रूप देवगुण का गजल संग्रह “ कहो बात दिल की ” भी इसी का उदाहरण है | शायर अपनी 70 गजलों के द्वारा प्रेम, समाज और जीवन-दर्शन की बात करता है |

बुधवार, अक्तूबर 04, 2017

श्रृंगार के विरह पक्ष को ब्यान करता संग्रह

कविता-संग्रह – सिर्फ तुम से ही
कवयित्री – विम्मी मल्होत्रा
प्रकाशन – समर पेपरबैक्स
पृष्ठ – 102
कीमत – 110 /- ( पेपर बैक )
प्यार और इन्तजार की बात करती कविताओं का गुलदस्ता है ‘ विम्मी मल्होत्रा ’ का प्रथम कविता-संग्रह “ सिर्फ तुम से ही ” | पुस्तक का शीर्षक ही विषय वस्तु को ब्यान करता है | इस संग्रह में इस शीर्षक की कोई कविता नहीं, लेकिन सभी कविताएँ जिस अज्ञात को समर्पित हैं, जिस प्रिय को कवयित्री ने अपनी रचनाओं का आधार बनाया है, उसी को शीर्षक के माध्यम से दर्शाया है | हालांकि प्यार से इतर विषयों पर भी कवयित्री ने कलम चलाई है, लेकिन इस संग्रह का मुख्य स्वर प्यार ही है |

बुधवार, सितंबर 27, 2017

निजी अनुभवों और सामाजिक मुद्दों की बात करता संग्रह

पुस्तक – मन दर्पण
लेखक – माड़भूषि रंगराज अयंगर
प्रकाशक – बुक बजूका
कीमत – 175 /-
पृष्ठ – 166 ( पेपरबैक )
माड़भूषि रंगराज अयंगर कृत ‘ मन दर्पण ’ 5 गद्य और 60 पद्य रचनाओं से सजा संग्रह है | इन 65 रचनाओं में लेखक ने निजी पीडाओं, निजी अनुभवों और सामाजिक मुद्दों पर अपनी लेखनी चलाई है |

बुधवार, सितंबर 20, 2017

भक्ति और नैतिक मूल्यों की बात करता कविता-संग्रह

कविता-संग्रह – अर्चना के उजाले
कवि – ज्ञानप्रकाश ‘ पीयूष ’
प्रकाशक – सुकीर्ति प्रकाशन, कैथल
पृष्ठ – 160
कीमत – 400 /- ( सजिल्द )
जीवन कैसा है, कैसा होना चाहिए और आदर्श जीवन के लिए कैसी जीवन शैली अपनाई जाए, इसका चिन्तन बुद्धिजीवी वर्ग करता ही है | इसी प्रकार का चिन्तन झलकता है ‘ ज्ञानप्रकाश पीयूष ’ जी के प्रथम कविता-संग्रह “ अर्चना के उजाले ” में | उन्होंने इस संग्रह में जीवन के विभिन्न पक्षों को छूने के साथ-साथ वीर जवानों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की है, भारत रत्न अब्दुल कलाम, शहीद हनुमंथप्पा और कर्त्तव्यनिष्ठ दानामांझी के चरित्र को दिखाती कविताएँ भी लिखी हैं | वे राष्ट्रीय युवा दिवस को याद करते हुए विवेकानन्द को याद करते हैं तो कलम के सिपाही प्रेमचन्द को भी शब्द-गुच्छ भेंट करते हैं, लेकिन उनकी कविताओं का मुख्य स्वर भक्ति भावना और नैतिक मूल्यों का समर्थन ही है |

बुधवार, सितंबर 13, 2017

बाल मनोविज्ञान की गहरी समझ को दिखाता कहानी-संग्रह

बाल कहानी-संग्रह – बचपन के आईने से
कहानीकार – डॉ. शील कौशिक
प्रकाशक – अमृत बुक्स, कैथल
पृष्ठ – 88
कीमत – 250/- ( सजिल्द )
बाल साहित्य लिखते समय लेखक के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है कि वह अपने स्तर को बच्चों के स्तर तक लेकर जाए, तभी वह बच्चों के प्रिय विषयों को चुन सकता है और विषयों को उस तरीके से निभा पाता है कि बच्चे उसे सहजता से आत्मसात कर सकें | डॉ. शील कौशिक के बाल कहानी-संग्रह “ बचपन के आईने से ” को पढ़ते हुए कहा जा सकता है कि लेखिका इस चुनौती की कसौटी पर खरी उतरी है | इस बाल कहानी-संग्रह में 18 कहानियां हैं | पुस्तक का शीर्षक किसी कहानी पर आधारित नहीं अपितु यह उनकी समग्रता पर आधारित है | लेखिका ने जीवन को बचपन के आईने से देखने का सफल प्रयास किया है |

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